मोतिहारी, अप्रैल 19 -- मोतिहारी। खेतीबाड़ी में हाड़ तोड़ मेहनत करने के बावजूद किसानों को लागत पूंजी निकालने में पसीने छूट रहे हैं। चाहे जेठ बैशाख की चिलचिलाती धूप हो या हाड़ कांपनेवाली ठंड में भी उनको राहत नहीं है। खाद बीज की महंगाई के बावजूद लहलहाती फसल पर मौसम की मार से किसान काफी आहत हो जाते हैं। फिर भी कलेजे को मजबूत कर अगली खेती की तैयारी में रम जाते हैं। यह हालात जिले में खेती किसानी की है। जलवायु परिवर्तन के दौर में असमय आंधी बारिश किसानों का बेड़ा गर्क कर देता है । तब मुआवजा के लिए टकटकी लगाए रहते हैं। यह भी पढ़ें- इंट्रो जोड़ :धरती पुत्रों की व्यथा 09 लेकिन भुगतान में पेच के कारण प्रभावित सभी किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता। ऐसे खेती किसानी से क्या लाभ ,जब लागत भी नहीं निकले। सरकारी स्तर पर अनाज बेचने में बिचौलिए के हावी रहने से ...
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