नई दिल्ली, जुलाई 4 -- पूजा या किसी भी धार्मिक कार्य को शुरू करने से पहले आचमन किया जाता है। यह एक बहुत जरूरी विधि है, जिसमें मंत्र पढ़ते हुए जल पीया जाता है। कहा जाता है कि आचमन शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की शुद्धि करता है। इससे मन एकाग्र होता है और पूजा का फल पूरा मिलता है। सनातन परंपरा में आचमन को पूजा का पहला और अनिवार्य हिस्सा माना गया है।आचमन क्या है? आचमन शब्द का अर्थ है जल पीना। पूजा शुरू करने से पहले हम तीन बार मंत्र बोलकर जल पीते हैं। यह सिर्फ जल पीने की क्रिया नहीं है, बल्कि शरीर और मन को शुद्ध करने का एक पवित्र तरीका है। जब हम आचमन करते हैं, तो हमारे अंदर की नकारात्मकता दूर होती है और पूजा के लिए हम तैयार हो जाते हैं।आचमन का धार्मिक महत्व धार्मिक ग्रंथों में आचमन को बहुत महत्व दिया गया है। इससे तीनों वेद - ऋग्वेद, यजुर्वेद और ...