डॉ. प्रकाशचंद्र गंगराड़े, जून 16 -- Puja me sankalp kyu liya jata hai: आमतौर पर संकल्प किसी कार्य को करने की दृढ़ इच्छाशक्ति को कहते हैं। यह किसी कार्य को करने से पहले की स्थिति होती है। जैसे कहा जाता है कि यदि मेरा अमुक संकल्प पूरा हो जाए, तो मैं भगवान के मंदिर जाऊंगा या किसी जरूरतमंद को कुछ दान करूंगा। पूर्ण श्रद्धा, आत्मविश्वास, एकाग्रता के साथ किसी शुभ कार्य, जैसे पूजा-पाठ आदि कर्मकांड को पूर्ण करने वाली धारणाशक्ति का नाम ही संकल्प है। उल्लेखनीय है कि दान और यज्ञ का पुण्य तभी प्राप्त होता है, जब संकल्प सहित उन्हें पूरा किया जाता है, इसलिए पूजा-पाठ सहित किसी भी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान में संकल्प अनिवार्य होता है। मनुस्मृति में लिखा है- संकल्पमूलः कामयो वै यज्ञः संकल्पसंभवा:। व्रतानि यमधर्मश्च सर्वे संकल्पजाः स्मृताः॥ (मनुस्मृति 2/3)...