नई दिल्ली, अगस्त 8 -- हिंदू धर्म में कुश घास को अत्यंत पवित्र माना गया है। ऋग्वेद से लेकर श्रीमद्भगवद्गीता तक में इसका उल्लेख मिलता है। गीता के अध्याय 6 के श्लोक 11 में भी कुश के आसन का महत्व बताया गया है। पूजा-पाठ, संस्कार और यज्ञ जैसे कार्यों में कुश घास का प्रयोग प्राचीन काल से चला आ रहा है। इसे पवित्रता, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। बिना कुश के कई धार्मिक कर्म अधूरे रह जाते हैं।शास्त्रों में कुश का स्थान शास्त्रों में कुश को भगवान विष्णु का स्वरूप भी कहा गया है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और वातावरण को शुद्ध बनाने में सहायक मानी जाती है। देवताओं और पितरों को प्रसन्न करने वाले कार्यों में इसका विशेष महत्व है। कुश की पवित्रता के कारण वैदिक काल से ही इसे धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न अंग बनाया गया। आज भी मंदिरों ...