पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाले पंचामृत को क्यों पवित्र माना जाता है? क्या है इसके पीछे का धार्मिक महत्व?
नई दिल्ली, जून 15 -- सनातन धर्म में पूजा-पाठ, यज्ञ और विभिन्न अनुष्ठानों में पंचामृत का विशेष स्थान है। यह सिर्फ पांच पदार्थों का मिश्रण नहीं है, बल्कि दिव्यता, शुद्धता और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। पंचामृत शब्द 'पंच' और 'अमृत' से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पांच ऐसे तत्व, जो अमरत्व देने वाले दिव्य रस के समान हैं। इसमें दूध, दही, घी, शहद और मिश्री का मिश्रण होता है।पौराणिक महत्व धार्मिक ग्रंथों में पंचामृत को समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक बताया गया है। जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया था, तब अमृत कलश प्रकट हुआ था। पंचामृत को उसी दिव्य अमृत का रूप माना जाता है। पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान विष्णु, शिव, कृष्ण और गणेश जैसे देवताओं के अभिषेक में पंचामृत का उपयोग करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।पांच तत्वों का प्र...
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