जबलपुर, मार्च 15 -- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सेना के एक लेफ्टिनेंट कर्नल के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म की FIR और चार्जशीट को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि 13 सालों तक चले लंबे संबंधों को केवल 'शादी के वादे' के आधार पर दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में पदस्थ महिला आरक्षक की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। दरअसल भोपाल पुलिस विभाग में पदस्थ एक महिला आरक्षक ने सेना के अधिकारी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने खुद को अविवाहित बताते हुए उनसे सम्पर्क किया और शादी का झांसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए। महिला का दावा था कि अधिकारी ने लंबे समय तक उसे धोखे में रखा। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता खुद पुलिस विभाग मे...
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