प्रयागराज, जुलाई 10 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति पर प्रतिकूल कब्जे (एडवर्स पॉजेशन) के आधार पर मालिकाना हक का दावा करता है, लेकिन उसी संपत्ति के बिजली बिल और हाउस टैक्स पुराने मालिक के नाम से जमा करता रहता है, तो यह उसके द्वारा पुराने मालिक के स्वामित्व को स्वीकार करना माना जाएगा। ऐसे में प्रतिकूल कब्जे के आधार पर स्वामित्व का दावा टिक नहीं सकता। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने यह टिप्पणी गाजियाबाद स्थित एक मकान पर प्रतिकूल कब्जे के आधार पर मालिकाना हक और स्थायी निषेधाज्ञा मांगने वाली अपील खारिज करते हुए की। याचिकाकर्ता का दावा था कि वह वर्ष 1996 से मकान पर खुले, निरंतर और विरोधात्मक कब्जे में है। अपने दावे के समर्थन में उसने शस्त्र लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, गैस कनेक्शन, टेलीफोन, बीम...