बुलंदशहर, मार्च 13 -- रसोई गैस के संकट का असर अब गांवों में भी दिख रहा है। महिलाएं गैस की किल्लत को चुनौती देते हुए पुराने ढर्रे पर लौट आई हैं। घर-आंगनों में चूल्हे सुलगने लगे हैं, चूल्हों की लिपाई के बाद रोटी बनाई जा रही है। कुछ नवविवाहिताओं को इनपर रोटी बानने से परेशानी हो रही है। रसोई गैस सिलिंडर की कमी को भांपते हुए ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं ने इस संकट से निकलने की पहल शुरू कर दी है, महिलाओं का कहना है कि पहले की अपेक्षा चूल्हे पर खाना बनाना कम हो गया है। घर के सभी लोग गैस पर खाना पकाने के साथ अन्य कार्य करने के आदि हो गए हैं लेकिन जब गैस की कमी है तो उन्होंने चूल्हों पर कार्य करना शुरू कर दिया।वहीं नवविवाहिताएं जो चूल्हे पर खाना पकाना नहीं जानती, उनके लिए यह समय काफी चुनौती भरा है। पर गैस की मारामारी को देखते हुए ऐसी महिलाओं ने भी अ...
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