पुरानी शैली से पार पाने को जूझे रंग प्रशिक्षु
वाराणसी, जून 29 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पारसी थियेटर की सिर्फ यही एक विशेषता नहीं है कि उसमें जोर-जोर से संवाद बोला जाता है। इसके और भी कई पक्ष हैं। रविवार को नागरी नाटक मंडली के मंच पर अभिनय करने वाले नए दौर के रंग प्रशिक्षुओं ने पुराने दौर के थियेटर की चुनौतियों से पार पाने का हर संभव प्रयास किया। उनके जुझारूपन को दर्शकों ने स्पष्ट रूप से महसूस किया। यह भी पढ़ें- Purnia News कलाभवन में 'सीता स्वयंवर' और 'सिंहासन' नाटक का मंचनकार्यशाला का आयोजन अवसर मंडली की ओर से आयोजित 29वीं नवांकुर कार्यशाला में वरिष्ठ वर्ग के प्रतिभागियों के नाटक 'वीर अभिमन्यु' के मंचन का था। मंचन के दौरान रंग दर्शक यह अंदाजा ही लगाते रह गए कि नाटक में संवाद जोर-जोर से बोले जा रहे हैं या संवाद के नाम पर चिखना-चिल्लाना हो रहा है। वास्तव में मंच पर क्या हो रहा है,...
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