जमशेदपुर, फरवरी 26 -- निर्माण क्षेत्र में स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एनआईटी जमशेदपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिक संजय कुमार, अनुसूया साहू और एकेएल श्रीवास्तव ने एक नया फॉर्मूला विकसित किया है, जो पुरानी इमारतों के मलबे (आरसीए) का पुनर्चक्रण करता है और तांबा उद्योग से निकलने वाले कचरे यानी कॉपर स्लैग का भी प्रभावी उपयोग करता है। यह शोध सेल्फ-कंपैक्टिंग कंक्रीट (एससीसी) पर आधारित है, जो अपनी तरलता और बिना किसी बाहरी दबाव के खुद सेट होने की क्षमता के लिए जाना जाता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि प्राकृतिक पत्थरों और रेत के स्थान पर मलबे और कॉपर स्लैग का सही मिश्रण पारंपरिक कंक्रीट की तुलना में अधिक मजबूत और किफायती साबित होता है। इस शोध की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मजबूती और पर्यावरणीय ला...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.