नई दिल्ली, मई 28 -- भारतीय लोकतंत्र केवल मतदान की प्रक्रिया का नाम नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास का आधार है, जिसके अनुसार हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिले और अपात्र व्यक्ति चुनावी व्यवस्था का हिस्सा न बने। इसी मूल भावना को केंद्र में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 26 मई को अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया और साफ शब्दों में कहा कि निर्वाचन आयोग को संविधान और कानून के अंतर्गत मतदाता सूची की गहन समीक्षा करने का पूरा अधिकार है। उसके मुताबिक, यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की सांविधानिक आवश्यकता को मजबूत करती है। इस फैसले को केवल एक कानूनी निर्णय मानना पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि इसका प्रभाव देश की चुनावी राजनीति, लोकतांत्रिक ढांचे और भविष्य की चुनाव-प्रक्रिया पर दूरगामी रूप से पड़ने वाला है। दरअसल, एसआईआर की प्रक्रिया ने भारतीय लोकतंत...