प्रमुख संवाददाता, अप्रैल 28 -- कभी-कभी एक पल का गुस्सा जिंदगी भर की सजा बन जाता है। लगभग 40 साल पहले पत्नी से झगड़ने के बाद घर की दहलीज लांघते वक्त चतुरी गुप्ता उर्फ काका हलवाई को अंदाजा भी न था कि यह कदम उन्हें परिवार से इतना दूर कर देगा कि एक दिन अपने बेटों के सामने वे अजनबी बन जाएंगे। उधर घर में पत्नी की प्रतीक्षा पत्थर होती गई, बच्चे पिता के साये के बिना बड़े हो गए. और इधर खुद चतुरी अपनों के होते भी बेनाम, बेसहारा जिंदगी जीते रहे। चार दशक बाद जब अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी आखिरी सांसों से जूझ रही थी, तब किस्मत ने वो मोड़ लिया, जहां दर्द अपनी चरम सीमा पर था।40 साल लावारिस की जिंदगी बताई पिता सामने अस्पताल के बिस्तर पर थे तो बेटे सामने असहाय खड़े थे, मगर पहचान कहीं खो चुकी थी। उसी खोई हुई पहचान को लौटाने के लिए बेटों के पास मां की दी प...
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