पीरियड्स में बेटी खुद को संभाल नहीं पाती, माता-पिता ने तकलीफ बता मांगी गर्भाशय हटाने की अनुमति; क्या बोला कोर्ट
नई दिल्ली, सितम्बर 29 -- दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि दिव्यांगता कभी भी किसी के शरीर से प्रजनन अंग हटाने की मंजूरी देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि सर्जिकल हस्तक्षेप केवल मेडिकल एक्सपर्ट्स के सुझाव पर उसी स्थिति में किया जा सकता है, जब यह उस व्यक्ति के सबसे अच्छे हित में, उसकी भलाई और सम्मान की रक्षा के लिए हो। उच्च न्यायालय ने यह बातें एक दिव्यांग युवती के माता-पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहीं, उनका कहना है कि बीमारी की वजह से उनकी बेटी पीरियड्स के दौरान खुद को संभाल नहीं पाती है और उसे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्होंने हाई कोर्ट से दिल्ली सरकार को उनकी बेटी की हिस्टेरेक्टॉमी सर्जरी (गर्भाशय को ऑपरेशन से हटाना) करने की अनुमति देने का निर्देश देने की मांग की। यह भी पढ़ें- 'वे अपनी ...
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