बांदा, अप्रैल 6 -- बांदा, संवाददाता। तिंदवारी थाने के ग्राम पचासा डेरा मजरा जौहरपुर में पीड़ितों को अपनी साढ़े पांच बीघे जमीन बचाने के लिए एक वर्ष तक संघर्ष करना पड़ा। पद और रसूख के चलते तहसीलदार से लेकर उच्चाधिकारियों तक ने पीड़ितों की नहीं सुनी। पीड़ितों का कहना है कि कोर्ट ने एक माह के भीतर तीन बार आदेश किया, पर एफआईआर नहीं लिखी गई। चौथी बार में सख्त चेतावनी पर कार्रवाई हुई। अब आगे भी पुलिस मामले में एफआर लगाने का प्रयास करेगी। पीड़ित पक्ष के रामजीत के पुत्र दलजीत ने बताया कि चकबंदी के बाद धारा छह के प्रकाशन के बाद तमाम लोगों की भूमि बैनामा के बाद दोबारा भूस्वामियों के नाम चली गईं। गांव के पाल समाज के लोगों की 13 बीघा जमीन भी ऐसे ही साजिश का शिकार हुई। पीड़ित हाईकोर्ट गए और आदेश के बाद उन्हें फिर जमीन नामांतरित कर दी गई, लेकिन ब्लाक प्...
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