रुडकी, सितम्बर 25 -- लक्सर, संवाददाता। सनातन हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और पिंडदान का विशेष अवसर माना जाता है। इस वर्ष पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ संपन्न होगा। पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज अपने परिजनों से मिलने पृथ्वी लोक पर आते हैं। पितरों के आगमन को केवल मनुष्य रूप से जोड़कर नहीं देखा जाता है। कौए को पितरों का प्रतीक मानकर उसे भोजन कराने की परंपरा है। यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष का पहला दिन कल या परसों? जान लें श्राद्ध की सभी तिथियां और किस समय तर्पण करना उत्तम? यह भी पढ़ें- पितृ पक्ष में इन 7 चीजों का जरूर करें दान, पितरों की कृपा से बढ़ेगा धन-धान्य यह भी पढ़ें- Pitru Paksh Mela 2026: गया जी तैयार, प...