बांका, सितम्बर 28 -- पंजवारा(बांका), निज प्रतिनिधि। रविवार से पितृ पक्ष (श्राद्ध) का पावन कालखंड प्रारंभ हो चुका है। हिंदू धर्म में इस विशेष अवधि का अत्यधिक धार्मिक महत्व है, जिसमें श्रद्धालु अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण का अनुष्ठान करते हैं। इसी क्रम में रविवार सुबह से ही पंजवारा स्थित चीर नदी तट पर अपने पितरों को जल (तर्पण) देने और पिंडदान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। यह भी पढ़ें- पितृपक्ष में पितरों के स्मरण और श्राद्ध का विशेष महत्वअनुष्ठान के महत्व धार्मिक मान्यता है कि इन 16 दिनों के दौरान पूर्वज सूक्ष्म रूप से धरती पर आते हैं और अपने परिजनों से श्रद्धा, अन्न एवं जल ग्रहण करते हैं। गया, वाराणसी और हरिद्वार जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर चीर नदी के ...