नई दिल्ली, सितम्बर 22 -- Pitru paksha me kya nahi kharidna chahiye 2026: पितृ पक्ष 16 दिनों की अवधि होती है जिसमें पूर्वजों को याद किया जाता है। इस दौरान पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मण भोज कराया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के समय विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन समेत मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। कहा जाता है कि इस समय शुभ कार्यों को करने से पितृ दोष लगता है और पितर नाराज हो सकते हैं। पितृ पक्ष में नए कपड़े समेत कुछ सामानों की खरीदारी की भी मनाही होती है। हिंदू मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, तर्पण और उनके स्मरण का समय होता है। इसे संयम और सादगी का काल माना गया है, इसलिए इस अवधि म...