पितृपक्ष अमावस्या से पहले कब है कुशाग्रहिणी अमावस्या, कुशा को साल भर के लिए करते हैं एकत्र
नई दिल्ली, सितम्बर 7 -- कुशाग्रहणी अमावस्या क्यों खास मानी जाती है। कुशोत्पाटिनी अमावस्या क्या है, इसको समझने के लिए के पहले आप इसका अर्थ समझें, इसका मतलब है कि कुशा को उखाड़ने वाली अमावस्या। इस साल अमावस्या तिथि बहुत खास है। यह अमावस्या पितृपक्ष की अमावस्या से पहले आती है, इस दिन पूरे साल की कुशा को उखाड़ के घर में रख लिया जाता है। इसके लिए नियम और कायदे माने जाते है। इस कुशा का इस्तेमाल पूरे साल होता है, इसमें पितृपक्ष, गणपति महोत्सव, यज्ञ, हवन, संकल्प, तर्पण, आदि के काम आती है।कब है अमावस्या तिथि इस साल अमावस्या तिथि गुरुवार को 10 सितंबर को मनाई जाएगी। कुशाग्रहणी अमावस्या के लिए चतुर्दशी भी होनी चाहिए। आपको बता दें कि कुशा को विधिपूर्वक लाने की परंपरा है, इसे हर दिन नहीं लाते हैं, साल भर में एक ही दिन लगा सकते हैं। इसी अमावस्या के समय ...
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