पिता से प्रेरणा लेकर आजादी की जंग में कूदे थे हरिशंकर
मुरादाबाद, अगस्त 12 -- मुरादाबाद। जलियांवाला बाग कांड के किस्से सुनकर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है। इस कांड का बाबूलाल वैश्य पर इतना गहरा असर हुआ कि वह सरकारी नौकरी छोड़ कर आजादी की जंग में शामिल हो गए। इस परिवार के पिता पुत्र और दामाद सभी ने देश की आजादी के लिए अपना अहम योगदान दिया। बाबूलाल वैश्य मूलत: अमरोहा के रहने वाले थे जो उस वक्त मुरादाबाद जिले का ही हिस्सा था। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबूलाल वैश्य को अमरोहा के लाला लाजपत राय कहा जाता था। उन्होंने 1919 जलियांवाला बाग कांड के बाद अपनी सरकारी नौकरी (ब्रिटिशकाल में पुलिस विभाग में मुख्य कोषाधिकारी) पद से त्यागपत्र दे दिया और अमरोहा में ही असहयोग आंदोलन का नेतृत्व किया। अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें छह माह के कठोर कारावास का दंड दिया और उन्हें विभिन्न कारागारों में रखकर कठोर यातनाएं द...
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