पिता ट्रक ड्राइवर, बेटी ने दूसरे अटेंप्ट में फोड़ा UPPCS, 40वीं रैंक लाकर बनीं असिस्टेंट कमिश्नर
नई दिल्ली, नवम्बर 2 -- एक बेहद मशहूर शायरी है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस लाइन पर उत्तर प्रदेश के भदोही जिला की रहने वाली नेहा सिंह की कहानी बखूबी बैठती है। एक छोटे गांव से ताल्लुक रखने वाली नेहा सिंह ने सिविल सर्विस में जाने का सपना देखा। सपना बड़ा था, लेकिन रास्ते कठिनाइयों से भरे थे। पिता एक ड्रक ड्राइवर हैं और मां गृहणी। ऐसे में पढ़ाई के साधन भी सीमित थे। मगर, बेटी के सपने को पूरा करने में उनके पिता ने कोई कसर नहीं छोड़ी। अक्सर छोटे शहरों में लड़कियों की शादी जल्दी कर देते थे। मगर, नेहा सिंह के पिता ने इस सोच को भी बदला। उन्होंने बेटी को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ा। बेटी का सपना था यूपीएससी की सीएसई क्रैक कर आईएएस बने। मगर, कई प्रयासों के बावजूद उसे क्रै...
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