नई दिल्ली, मई 31 -- किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार से किसी बच्चे के अपने जैविक पिता के बारे में जानने का अधिकार ज्यादा महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए एक व्यक्ति को डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया है। यह निर्देश एक युवक द्वारा दायर पितृत्व संबंधी मुकदमे के संदर्भ में दिया गया है, जो खुद को उस व्यक्ति का जैविक पुत्र होने का दावा करता है। जस्टिस संजय करोल और एन.के. सिंह की बेंच ने किसी व्यक्ति के निजता के अधिकार की तुलना में किसी बच्चे के अपने जैविक पिता के बारे में जानने के अधिकार को ज्यादा महत्व दिया। बेंच के सामने एक पेचीदा मुद्दा सामने आया था। इसमें पितृत्व परीक्षण की लड़ाई में एक व्यक्ति और बच्चे के अधिकार को लेकर सवाल था। यह भी पढ़ें- राजस्थान की नदियों में जहर घोलने वालों पर सुप्रीम ...