नई दिल्ली, मार्च 30 -- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि पिता की मृत्यु के बाद मां ही नाबालिग बच्चे की प्राकृतिक अभिभावक (नेचुरल गार्जियन) होती है। अदालत ने कहा कि अगर संपत्ति संयुक्त परिवार की अविभाजित संपत्ति है और मां परिवार की वयस्क सदस्य के रूप में उसका प्रबंधन कर रही है, तो नाबालिग बच्चे के हिस्से की बिक्री के लिए अदालत की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य नहीं है, बशर्ते बिक्री बच्चे के कल्याण और हित में हो। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने श्रीमती डोली बनाम श्रीमती शकुंतला देवी मामले में यह फैसला सुनाया। यह प्रथम अपील (फर्स्ट अपील फ्रॉम ऑर्डर) 23 मार्च 2026 को पारित की गई। दरअसल, सहारनपुर जिले की एक विधवा महिला श्रीमती डोली ने अपनी नाबालिग बेटी की उच्च शिक्षा के लिए संयुक्त परिवार की अविभाजित संप...
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