पिता के अंतिम संस्कार के लिए बेटियों के पास वक्त नहीं; 5100 भेजें, वीडियो कॉल पर देख ली मुखाग्नि
नई दिल्ली, अगस्त 6 -- एक पिता अपनी पूरी जिंदगी खुद को तिल-तिल जलाकर अपनी संतानों के सुनहरे भविष्य की नींव रखता है। लेकिन जब वही पिता दुनिया से रुखसत हो जाए और उसकी आखिरी सांसों के वक्त उसके अपने ही पास न हों, तो इसे किस्मत का मारा ही कहा जाएगा। सोनीपत के एक वृद्धाश्रम से एक ऐसी ही घटना सामने आई है। यह कहानी उस बदनसीब बाप की है जिसने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर काबिल तो बना दिया, लेकिन उनके पास अपने पिता को अंतिम विदाई देने तक का वक्त नहीं था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक मूल रूप से मुंबई के रहने वाले और पूर्व कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता अपनी पत्नी मीना के साथ पिछले डेढ़ साल से सोनीपत के वेस्ट राम नगर स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे थे। पत्नी का निधन कुछ समय पहले ही हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार तड़के करीब साढ़े ...
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