जमशेदपुर, सितम्बर 19 -- जमशेदपुर। डिफेंडर सार्थक के लिए फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जीवन का अहम हिस्सा है। बचपन में जब वह महज पांच साल के थे, तभी पिता के साथ मैदान जाते थे और वहीं से खेल के प्रति लगाव शुरू हुआ। सार्थक कहते हैं, "मेरे पिता ही मेरे पहले कोच और सबसे बड़े समर्थक रहे। उन्होंने ही खेल की बुनियादी सीख दी।" पिता से मिली इस प्रेरणा ने ही उन्हें प्रोफेशनल फुटबॉल तक पहुंचाया। जमशेदपुर एफसी (जेएफसी) की लाल जर्सी पहनना उनके लिए गर्व का पल रहा। सार्थक ने कहा, "जेएफसी का हिस्सा बनना मेरे करियर का खास अनुभव रहा। पहला मैच डुरंड कप में खेलना किसी सम्मान से कम नहीं था।" मैदान पर सार्थक खुद को सख्त डिफेंडर मानते हैं। "मेरा मकसद हर हाल में टीम की रक्षा करना है। चाहे टैकल हो, गोल लाइन पर बचाव या ब्लॉक-ये क्षण मुझे संतोष देते हैं," वे कहते हैं...
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