नई दिल्ली, नवम्बर 8 -- सफलता की कहानियां अक्सर मेहनत और लगन से बनती हैं, लेकिन जब उसमें देशसेवा का जुनून और शहादत की विरासत जुड़ जाए, तो वह कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा का एक अमर स्रोत बन जाती है। कुछ ऐसी ही प्रेरक कहानी है महाराष्ट्र के रहने वाले लेफ्टिनेंट प्रज्वल समरित की, जिन्होंने कॉरपोरेट दुनिया की लाखों की सैलरी और देश के प्रतिष्ठित IIM के अवसरों को ठुकराकर भारतीय सेना में अधिकारी बनने की राह चुनी।जन्म के 45 दिन बाद सिर से उठा पिता का साया साल 1999 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल का भीषण युद्ध चल रहा था, तब प्रज्वल का जन्म हुए महज 45 दिन ही हुए थे। इसी दौरान उनके पिता लांस नायक कृष्णाजी समरित देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए। प्रज्वल ने कभी अपने पिता का चेहरा सामने से नहीं देखा था, लेकिन वे बचपन से ही अपनी मां स...