प्रयागराज, अप्रैल 29 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यह नहीं कहा जा सकता कि पिता को अपने नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा किसी भी व्यक्ति को सौंपने का अधिकार है और किसी को पिता की अभिरक्षा स्थानांतरित करने को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने युवराज, आयुष्मान व अन्य की विशेष अपील पर अधिवक्ता रामधन को सुनने के बाद अपील स्वीकार करते हुए दिया है। एकल पीठ (सिंगल बेंच) ने कहा था कि एक पिता, जो नाबालिग बच्चे का नैसर्गिक संरक्षक है, उसे अपने नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा किसी भी व्यक्ति को स्थानांतरित करने का पूरा अधिकार है। खंडपीठ ने इसे नामंजूर करते हुए कहा किसी भी हालत में ऐसा आदेश कायम नहीं रह सकता। यह भी कि माता-पिता में से ...