बागेश्वर, अप्रैल 29 -- देवेंद्र पांडे, बागेश्वर। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान अल्मोड़ा के ईआईएसीपी केंद्र ने बागेश्वर जिले में स्थित पिंडारी ग्लेशियर क्षेत्र का पर्यावरणीय सर्वेक्षण किया है। इसका उद्देश्य ग्लेशियर के पीछे खिसकने, भू-क्षरण और जैव विविधता पर पड़ रहे प्रभावों का आकलन करना है। सर्वेक्षण दल में डॉ. महेशानंद, डॉ. रविंद्र जोशी, इंजीनियर कमल टम्टा, हेम तिवारी और मनीष शामिल रहे। सर्वेक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले कई दशकों से ग्लेशियर लगातार पीछे खिसक रहा है, जो जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है। पिंडारी ग्लेशियर से निकलने वाली पिंडर कुमाऊं और गढ़वाल को जोड़ने वाली प्रमुख नदी है, जिसका संगम कर्णप्रयाग में अलकनंदा से होता है। यह भी पढ़ें- सूख गई बूढ़ी राप्ती, अस्तित्व पर संकट यह ...
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