मुजफ्फरपुर, अगस्त 20 -- पारू, विनोद पासवान। जंग-ए-आजादी के तीन गुमनाम वीर सपूतों को अब तक शहीद का दर्जा नहीं मिल पाया है। 22 अगस्त सन 1942 को वीरपुर (सरैया) के योद्धा सिंह, पारू के जाफरपुर के छकौड़ीलाल साह और फुलाढ़ गांव के अनुराग सिंह को पारू थाने पर तिरंगा फहराने के दौरान अंग्रेज पुलिस ने गोलियों से भून दिया था। गोली लगने के बाद भी जख्मी छकौड़ीलाल तिरंगे को झुकने नहीं दिए। वहीं, अंग्रेज पुलिस उन्हें तब तक पानी में डुबोती रही जब तक उनकी सांसे चलती रही। कहा जाता कि उक्त पोखर का पानी खून से लाल हो गया था। यहां तक कि छकौड़ीलाल की लंबी-लंबी मूंछे को भी पुलिस ने उखाड़ डाला था। इस गोलीबारी में उक्त तीनों के अलावा भगवानपुर सिमरा गांव के गंगा साह भी जख्मी हो गए थे, लेकिन वे पुलिस की पकड़ में नहीं आए। बाद में इलाज के अभाव में उनकी भी मौत हो गई। इन वीर...
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