गिरडीह, जून 6 -- पीरटांड़। विश्व पटल पर अपनी अलग पहचान स्थापित करने की ओर अग्रसर पारसनाथ की तराई वाले आदिवासी बहुल गांवों में आजादी के 78 वर्ष बाद भी विकास की किरण नहीं पहुंच पाई है। पारसनाथ पहाड़ के चहुंओर बसा आदिवासी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरुम है। क्षेत्र के दर्जनों आदिवासी बहुल गांव पक्की सड़क जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। सड़क के अभाव में आये दिन मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञात रहे कि पारसनाथ पहाड़ की तराई स्थित पूर्वी क्षेत्र में बसे आदिवासी बहुल गांव दहिया, जराबाद, दलुवाडीह, सहरबेड़ा, जिरवाबेड़ा, बरवाबेड़ा, सतकटिया, कुरुवाटांड़, ईटाबेड़ा तथा पश्चिमी छोर में स्थित तिरिलटांड़, छक्कूडीह, डेगापहाड़ी, मोहनपुर, चेताल टंडी, मड़मटांड़ से टेसफुल्ली, हेठ कुबरी, पक्कीटांड़ के अलावा भी कई गांव सड़क समस्या से जूझ रहे हैं। देश आज...