पारंपरिक मछलियों को बचाए बिना नहीं बचेंगी नदियां
नई दिल्ली, जून 30 -- पंकज चतुर्वेदी,वरिष्ठ पत्रकार नदियों के प्रबंधन को लेकर दुनिया भर में चल रही पारंपरिक बहसों के बीच एक हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने नई और चौंकाने वाली दृष्टि सामने रखी है। अमूमन जब हम बांधों, जलविद्युत परियोजनाओं या जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों की चर्चा में नदियों में रहने वाले जीवों को मूक शिकार के रूप में देखते हैं। माना जाता है कि पानी का बहाव कम होने या तापमान बदलने से मछलियों का अस्तित्व संकट में पड़ रहा है, लेकिन वाटर रिसोर्सेज रिसर्च नामक प्रतिष्ठित शोध पत्रिका में प्रकाशित ताजा अध्ययन इस स्थापित धारणा को चुनौती देता है। इस शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि मछलियां जल प्रणालियों में केवल जीवन नहीं बितातीं, बल्कि वे अपने व्यवहार और शारीरिक बदलावों से पूरी नदी की बनावट, उसके पारिस्थितिकी-तंत्र, तलछट के प्रवाह और य...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.