इंदौर, मार्च 12 -- "पापा, मम्मी, भैया, दादा... मैं अपने असली परिवार के पास जा रहा हूं। आप गांव चले जाना। आपके साथ का जीवन पूरा हो गया है... रोइएगा नहीं। मुझे खोजने की कोशिश भी न कीजिएगा" भावुक और हैरान कर देने वाले ये शब्द 13 साल के बच्चे के हैं। इंदौर में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले रुद्र ने अपना घर-द्वार छोड़ दिया है। घर छोड़ने से पहले उसने एक चिट्ठी लिखी। इसमें घर छोड़कर जाने की वजह बताई।चिट्ठी में प्रेमानंद महाराज का जिक्र चिट्ठी में रुद्र ने प्रेमानंद महाराज का जिक्र किया है। उसने लिखा- आप लोग ये मत सोचना कि मैं किसी के डांटने-मारने या बोर्ड रिजल्ट या फिर ज्यादा प्यार न मिलने की वजह से भागा हूं। मैं तो बस असलियत जान गया हूं। अगर आपको जानना है कि मैंने कौन सी असलियत जान ली है, तो फोन के फोटो में जाकर देखना, तो उसमें प्रेमानंद जी महाराज...
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