मुजफ्फरपुर, जनवरी 8 -- मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। मानसूनी बारिश में कमी से नदियों के साथ ही भूगर्भ जल का स्तर कम होता जा रहा है। वहीं, बढ़ते शहरीकरण और कई अन्य कारणों से नदियों का पानी प्रदूषित होता जा रहा है। इसका असर आम जनजीवन के साथ सबसे ज्यादा पशुपालकों पर पड़ा है। हालत यह कि कई छोटी नदियों में पशुओं के लायक भी पानी नहीं बचा है। इससे पशुओं को नहलाने से लेकर उनके पीने के पानी का प्रबंध करने में पशुपालकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। साथ ही चारे की कमी से साल के छह महीने जूझना पड़ता है। नदियों का पानी प्रदूषित होने के कारण पशु कई तरह के संक्रामण रोगों के शिकार हो रहे हैं। मुजफ्फरपुर के पशुपालकों को पिछले एक दशक से ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। कुढ़नी प्रखंड के छितरौली गांव निवासी 75 वर्षीय कमल राय और 60 साल के अर्जुन राय कहते है...