पाखंड को ध्वस्त करती 'रश्मिरथी' सामाजिक समरसता का दर्शन
मुजफ्फरपुर, जुलाई 8 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। दिनकर राष्ट्रीय भाव के ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के भी बड़े कवि थे। रश्मिरथी दिनकर जी की कालजयी कृति है, जो सामाजिक समरसता को व्यापक संदर्भों में प्रस्तुत करती है। जाति और सत्ता के पाखंड को ध्वस्त करने वाली यह कृति वैश्विक मनुष्यता के पक्ष में मजबूती से खड़ी होती है। ये बातें मंगलवार को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की चर्चित कृति रश्मिरथी के लेखन एवं प्रकाशन की हीरक जयंती पर हनुमान नगर पार्वती सदन में आयोजित दिनकर की रश्मिरथी एक संवाद विषयक संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. संजय पंकज ने कहीं।उन्होंने कहा कि महाभारत के पराक्रमी योद्धा कर्ण के पुरुषार्थ और शौर्य की प्रतिष्ठा करते हुए दिनकर जी ने यह प्रतिपादित किया है कि सत्ता के लिए किसी वंश परंपरा की अनिवार्यता नहीं है। प्रतिभाशाली और उत्...
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