वाराणसी, मार्च 16 -- वाराणसी, संवाददाता। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में दाखिल होते ही एक अलग ही माहौल दिखाई दे रहा था। टेक्नेक्स-2026 में लगी प्रदर्शनी में एक ओर सेना का कैंप, तो दूसरी ओर आसमान में उड़ते ड्रोन यह अहसास कराते हैं कि थल और नभ में हमारा इंतज़ाम पूरी तरह पुख्ता है। चंद कदम आगे बढ़ते ही जल में भी मजबूती के नए चित्र भी सामने आ गए। जिसे देख कर भरोसा हो गया कि अब 'गाजी' हो या कोई अन्य पाकिस्तानी युद्धपोत, सबका इलाज हमारे पास है।स्वतंत्रता भवन में आईआईटी कानपुर के स्टॉल पर पहुंचने वाले बुजुर्गों को 4-5 दिसंबर 1971 की वह घटना याद आ रही थी, जब भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस गाजी ने विशाखापत्तनम बंदरगाह में दाखिल होने की गुस्ताखी की थी। तब भारतीय नौसेना के विध्वंसक आईएनएस राजपूत ने इसे विशाखापत्तनम तट से लगभग ...
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