बाराबंकी, जनवरी 13 -- निन्दूरा। विकास खंद देवा के ग्राम बलवन्तपुर भानमतिया स्थित बाबूदास कुटी पर शुक्रवार से प्रारंभ हुई पांच दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा मंगलवार को विधिवत संपन्न हो गई। अंतिम दिवस पर कथावाचक वेद प्रकाश सिंह यादव ने महाभारत के युद्ध से पहले का प्रसंग सुनाया। कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस विनाशकारी युद्ध को टालने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन जब सभी प्रयास विफल हुए, तब धर्म की रक्षा के लिए युद्ध अनिवार्य हो गया। भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध रोकने के उद्देश्य से सबसे पहले पांडवों को धैर्य, संयम और सहनशीलता का मार्ग दिखाया। उन्होंने युधिष्ठिर को बार-बार समझाया कि वे शांति के लिए अंतिम सीमा तक प्रयास करें। इसके बाद स्वयं श्रीकृष्ण शांति दूत बनकर हस्तिनापुर पहुंचे और कौरवों के समक्ष पांडवों की ओर से केवल पांच गांवों की मांग रखी, जिसस...
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