बांका, दिसम्बर 10 -- बौंसी, निज संवाददाता। ऐतिहासिक मंदार क्षेत्र का बौसी मेला कभी परंपरागत नौटंकी एवं सर्कस आदि मनोरंजन गृहों के लिए जाना जाता था। लेकिन 11 साल पूर्व मेला में हुई एक छोटी सी घटना के बाद बौसी मेले में थिएटर का प्रदर्शन बंद हो गया है । नौटंकी थिएटर एवं अन्य मनोरंजन के साधन आने बंद हो गए का व्यापक असर बौसी मेले पर पड़ा है और लोगों की आवाजाही भी कम हुई साथ ही मेले का अवधी भी कम हो गया। बिहार के सुप्रसिद्ध कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यास मारे गए गुलफाम पर बनी फिल्म तीसरी कसम और उसका हीरामन थियेटर की नर्तकी हीराबाई के माहौल की याद बौंसी मेले में नौटंकी देखने को मिलती थी। बौंसी मेला का इतिहास करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। स्थानीय जानकार बताते हैं कि 8 2 सालों से बौसी मेले में थिएटर सहित अन्य मनोरंजक गृहों का आगमन हो रहा है। 70 क...
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