रायबरेली, फरवरी 2 -- रायबरेली, संवाददाता। "उम्र भर बोझ उठाती रही, छतें कमजोर होकर, मकां टूटता रहा और हम बेखबर होकर" उक्त पक्तियां नगर पालिका की सुपर मार्केट पर सटीक बैठती है। 1975 में शहर की शान बनकर निखरी सुपर मार्केट की कभी मरम्मत नहीं करायी गयी। इस भवन का मालिक भी इसी के एक कोने पर आज भी रह रहा है लेकिन जर्जर हो रही छतों पर उसने नजर नहीं डाली। परिणाम यह हुआ कि भवन का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह से कमजोर हो गया। वहां पर पेड खड़े हो गए लेकिन उनको हटाने तक की जहमत नहीं उठायी गयी। अब इसके आवंटियों से खाली कराने की तैयारी वह भी मौखिक शुरू हुई तो हायतौबा मच गया। व्यापारी नेता सड़क पर आ गए और नगर पालिका के जिम्मेदार सच से भागने लगे। जिले के आला हाकिम मूक दर्शक बन गए। शहर की पहली बहुमंजिला इमारत सुपर मार्केट को नगर पालिका ने बनवाया और 1975 में व्यापारि...
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