सीवान, अप्रैल 14 -- सीवान,हिन्दुस्तान संवाददाता। बात अगर बिहार और बिहारियों के पारंपरिक भोजन की हो, और फिर सत्तू, चटनी, प्याज, आचार की चर्चा नहीं हो तो बेमानी होगी। समय के साथ लोगों की जीवन शैली बदली और साथ ही बदला, खान पान का जायका भी, लेकिन अगर कुछ नहीं बदला तो वह, बिहार का पारंपरिक शुद्ध भोजन सत्तू, जो हर बिहारी, हर सिवानवासी और विशेषकर ग्रामीणों का प्रिय भोजन है, जिसकी मिठास और शुद्धता ही इसकी असली पहचान है। सीवान के सिविल कोर्ट परिसर में पिछले 47 वर्षों से सत्तू की दुकान चला आम से लेकर खास तक को शुद्ध व पारंपरिक भोजन सत्तू चटनी खिला रहे दिलीप प्रसाद के लिए उनकी दुकान व पेशा महज एक व्यवसाय नहीं, बल्कि सीवान की संस्कृति की एक पारंपरिक खान पान की पहचान है। यह भी पढ़ें- Satuan Sankranti 2026: सूर्य के मेष राशि में आते ही होती है सतुआन सं...