लोहरदगा, मई 10 -- लोहरदगा, संवाददाता। झखरा कुम्बा लोहरदगा सभागार में रविवार को जिले के सभी पहान, महतो और पुजार की वार्षिक कार्यशाला में पेसा कानून की बारीकियों से उन्हें अवगत कराया गया। इसमें मुख्य वक्ता पूर्व पंचायती राज निदेशक सह आयकर आयुक्त निशा उरांव ने कहा कि रूढ़िजन्य आदिवासी वह है जो कि अपने मूल सामाजिक प्रथा, धार्मिक प्रथा तथा कस्टमरी लॉ से जुड़ा है। ग्राम सभा केवल प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि यह आदिवासियों के लिए एक सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक केन्द्र है।पेसा कानून ग्राम सभा को विशेष शक्तियां देता है और आदिवासी रूढ़िजन्य कानून को संविधान तथा पेसा कानून मान्यता देता है। ग्राम प्रधान, हातू मुंडा, पड़हा राजा इत्यादि पर रीति-रिवाज और धर्म- परंपरा की रक्षा का जिम्मेदारी होता है। उनको सरना धर्म, जतरा तथा पूजा पाठ जैसे देसावली पूजा...
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