पहले गुरु तो पिता ही होते हैं : विरल
मुजफ्फरपुर, जुलाई 5 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। नयाटोला स्थित हरीतिमा में दि यूनिवर्सिटी ऑफ दि फ्यूचर की ओर से रविवार को आयोजित 'साहित्य-संवाद' में हिन्दी के कवि शिवेंद्र कुमार मौर्य की कविता 'पिता के शब्द' का पाठ हुआ। इसके बाद हिन्दी के आलोचक, रंगकर्मी, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवाओं ने विमर्श कर आज के संदर्भ में उसकी व्याख्या की।भोजपुरी और हिंदी के कवि कुमार विरल ने कहा कि पहले गुरु तो पिता ही होते हैं, जो हम में सत्य और असत्य, प्रेम और घृणा, करुणा और हिंसा के बीच अंतर करने की दृष्टि प्रदान करते हैं। वर्तमान में यह कविता हर प्रकार की विडम्बनाओं और विसंगतियों के खिलाफ खड़ा होने के लिए प्रेरित करती है।आरती सिंह ने कहा कि शिवेंद्र की कविता का फलक अत्यंत व्यापक है। उसमें गौरव है तो स्कूल जाती लड़कियां भी हैं। कवि रमेश ऋतंभर के अनुस...
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