बांदा, मई 28 -- अतर्रा। मृतक परिवारों को ढांढस बंधाने व अंतिम संस्कार में पहुंचे कोर्रही के बुजुर्गों ने बताया कि गांव में पहली बार ऐसा मातम हुआ है कि बकरीद में भी चूल्हे ठंडे पड़े हैं। कोर्रही गांव मुस्लिम बाहुल्य है। यहां हिंदु-मुस्लिम एक-दूसरे के पर्वों पर खुशियों में शरीक होते हैं। 85 वर्षीय बुजुर्ग शिवकरन ने बताया कि बुधवार को शाम तक पूरा गांव बकरीद की खुशियां मनाने की तैयारी में था। किसी को क्या पता था कि बालू भरा डंपर पल भर में खुशियां छीन लेगा। उनकी निगाहों ने अपने जीवन में ऐसी दुखद घटना पहली बार देखी है। इस हादसे में 42 वर्षीय ई-रिक्शा चालक राकेश कुमार पुत्र लोटन, उसकी 45 वर्षीय आशाबहू भाभी ममता, पीरू के 13 वर्षीय शाहबाज, 50 वर्षीय सोहनलाल वर्मा पुत्र रामलाल तथा 42 वर्षीय नवीन खान ने जान गंवा दी है। यह भी पढ़ें- ट्रक चालक के खिला...