बाराबंकी, जनवरी 24 -- बाराबंकी। सूबे की राजधानी लखनऊ के बॉर्डर से महज बीस किमी दूर एक गांव ऐसा है जहां आजादी के 78 वर्षों बाद गांव के युवा, बुजुर्ग और बच्चों को टीवी देखने से लेकर एलईडी की रोशनी महसूस करने का मौका मिला है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह गांव न तो वनांचल में स्थित है न ही पहाड़ियों के बीच मौजूद है, बल्कि यह गांव देवा विकास खंड गड़रियन पुरवा है। जहां बिजली पहुंचने में 78 वर्ष लग गए। गड़रियन पुरवा मजरे कमरखा में बिजली पहंुचने के बाद ग्रामीणों की खुशी का ठिकान नहीं है। ढिबरी और लालटेन के सहारे जीवन खफा देने वाले गांव के बुजुगोंर् की आंखें एलईडी की रोशनी देख चमक रही हैं तो युवाओं और बच्चों को ढिबरी के प्रकाश में पढ़ने से अब पूरी तरह छुटकारा मिल चुका है। उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्हें मोबाइल को चार्ज करने के लिए अब इधर उधर भट...
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