नई दिल्ली, मई 10 -- दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने एक फैसले में कहा कि पहली पत्नी के भरण-पोषण मामले में दूसरी पत्नी पक्षकार नहीं बन सकती है। दूसरी पत्नी ने गुजारा भत्ता से जुड़ी कार्यवाही में खुद को शामिल करने की मांग की थी। जस्टिस शर्मा ने पक्षकार बनाने वाली उसकी याचिका को खारिज कर दिया। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला दिया है कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पहली पत्नी और बच्चों द्वारा शुरू की गई भरण-पोषण की कार्यवाही में दूसरी पत्नी जरूरी पक्ष नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्यवाही को पति पर निर्भरता का दावा करने वाले हर व्यक्ति को इसमें शामिल करके बेवजह बढ़ाया नहीं जा सकता। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने एक महिला द्वारा दायर उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उसने ...
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