मुजफ्फरपुर, मार्च 8 -- मुजफ्फरपुर। भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब लोककलाओं में झलकता है। इन्हीं लोककलाओं में कठपुतली कला भी शामिल है। यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम भी है, लेकिन आज यह कला ही नहीं, बल्कि कलाकार भी संकट के दौर से गुजर रहे हैं। स्कूली शिक्षा में इसको जोड़ने से यह फिर से नई पहचान के साथ आगे तो बढ़ रही है, लेकिन इसके कलाकर आज भी आर्थिक तंगी की मार झेल रहे हैं। कभी कठपुतली कला से देश-विदेश में चर्चा बटोरने वाले कलाकार आज तंगहाली से जूझ रहे हैं। कहने को तो जिले में अब भी इस कला से जुड़े 200 से अधिक कलाकार हैं, लेकिन बदहाली के कारण कई दूसरे काम से जुड़ गए हैं। कलाकारों का कहना कि जब रोटी का जुगाड़ भी नहीं हो पाता तो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई कैसे हो पाएगी। सरकार की तरफ से इन्हें मदद की दरकार है।कठ...
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