जमशेदपुर, मई 23 -- जमशेदपुर। साकची स्थित मोती लाल नेहरु पब्लिक स्कूल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय नदी-पर्वत सम्मेलन ने पर्वतों, जल स्रोतों और भूजल संरक्षण हेतु वैधानिक ढांचा बनाने की ऐतिहासिक पहल की। पांच विशेषज्ञों को पांच दिनों में अंतिम मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। आठ सूत्री प्रस्ताव में जनजातीय समुदायों को पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षक मानने, नदी-पर्वतों के अधिकारों हेतु संस्थागत तंत्र बनाने और एक वर्ष में कानून बनाने का लक्ष्य रखा गया। सरकारों से विधेयक पारित करने का आग्रह किया गया। सम्मेलन तरुण भारत संघ, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, युगांतर भारती, नेचर फाउंडेशन, स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट, जल बिरादरी व मिशन वाई के तत्वावधान में हुआ। यह पहल पर्यावरण संरक्षण में मील का पत्थर साबित हो सकती है। अब सरकार के निर्णय पर सबकी निगाह...