कानपुर, सितम्बर 24 -- कानपुर। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, आनंदपुरी में गुरुवार को दशलक्षण पर्व के नवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म दिवस मनाया गया। प्रातः मंदिर जी में अभिषेक क्रिया के पश्चात भगवान जी की प्रथम शांतिधारा का सौभाग्य पीयूष और द्वितीय कमल पटौदी को प्राप्त हुआ। इसके बाद पंडित राकेश जैम ने तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन अर्थ सहित किया। उन्होंने कहा कि इस अनंत ब्रह्मांड में मेरा परमाणु मात्र भी कुछ नहीं है, मैं एकदम अकेला और अकिंचन हूं। इस परम सत्य को स्वीकार करना ही उत्तम आकिंचन्य धर्म है। हमारी चेतन आत्मा ही हमारी एकमात्र, शाश्वत और वास्तविक संपत्ति है। मकान, धन, वस्त्र और परिवार सब बाहरी संयोग हैं, जो एक दिन छूट जाने वाले हैं। यह भी पढ़ें- Deogarh News: परीग्रह के पूर्णत: त्याग होने पर ही प्रकट होता है उत्तम आकिंचन धर्म आकिंचन्य धर्म ...