पर्यावरण संतुलन पर भारी पड़ रहा रेत खनन
फतेहपुर, मई 21 -- फतेहपुर। जिले की नदियों में लगातार बढ़ रहे रेत खनन ने अब पर्यावरण संतुलन पर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। नदियों की सतह से तेजी से गायब हो रही रेत न सिर्फ जल संरक्षण क्षमता को प्रभावित कर रही है, बल्कि धरती की नमी कम होने से तापमान में भी लगातार वृद्धि होती जा रही है। जानकारों का कहना है कि धरती की नमी बनाए रखने के लिए रेत का विशेष महत्व होता है। जिले की गंगा, यमुना, पांडु, रिंद नदी के आसपास होने वाले खनन को लेकर लोगो की चिंता बढ़ती जा रही है। जानकारों का कहना है कि नदियों की रेत व बालू प्राकृतिक जल संरक्षण का काम करती है। बारिश के दिनों में यह पानी को सोखकर लंबे समय तक भूगर्भ में संरक्षित रखती है। नतीजतन आसपास के इलाकों में नमी बनी रहती है और भू-जल स्तर संतुलित रहता है। लेकिन अत्यधिक खनन के कारण यह प्राकृतिक व्यवस्था दिनो...
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