मेरठ, अक्टूबर 10 -- मेरठ। प्रमुख संवाददाताजलवायु और समावेशी विकास पर वैश्विक मंथन नागरिकों के तौर पर हमारी भी जवाबदेही की होनी चाहिए। हमें ऐसे नेताओं को चुनना चाहिए जो आर्थिक विकास एवं जैव विविधता के बीच संतुलन बनाए रखने के प्रति जवाबदेह हों। पर्यावरण की सीमाओं का ध्यान रखे बिना विकास मृगतृष्णा (भ्रम) है। एक स्वस्थ ग्रह के बिना समानता खोखली है। हम एक अहम मोड़ पर हैं। आईपीसीसी की रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक जलवायु परिवर्तन से 25 करोड़ से अधिक भारतीयों को खराब मौसम का सामना करना पड़ सकता है। भूटान के पारो शहर में सोसाइटी फॉर पाथवेज़ टू सस्टेनेबिलिटी द्वारा 'नोरबुलिंग रिग्टर कॉलेज' के सहयोग से 'प्रकृति, अर्थव्यवस्था और समाज में तालमेल: समावेशी और लचीले विकास के रास्ते' विषय पर हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उक्त बात सीसीएसयू में अर्थशास्त्र के ...