नई दिल्ली, मई 29 -- पेपर लीक के बाद नीट-यूजी रद्द करने की प्रक्रिया की निगरानी अगर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं, तो यह बहुत सराहनीय है। सर्वोच्च न्यायालय ने पूछा था, पेपर लीक जांच किस तरह की जाएगी, जवाब में सरकार ने प्रधानमंत्री के नाम का उपयोग किया है। यदि प्रधानमंत्री स्वयं जांच की निगरानी कर रहे हैं, तो इससे दूध का दूध और पानी का पानी होने की संभावना बहुत बढ़ गई है। दरअसल, नीट पेपर लीक को लेकर बहुत नाराजगी देखी जा रही है और इसका एहसास सरकार को है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जिस तरह से सरकार का पक्ष रखा है, उससे भी अंदाजा होता है कि सरकार पेपर लीक को लेकर गंभीर है। न्यायमूर्ति नरसिम्हा का यह कहना वाजिब है कि उच्च स्तरीय समिति के बावजूद अगर यह घटना हुई है, तो यहां मूल सिफारिश में कुछ गड़बड़ी है या ढंग से क्रियान्वयन नहीं ...