गोंडा, मई 10 -- करनैलगंज, संवाददाता । कहने को तो करनैलगंज नगर पालिका परिषद की सीमा से नगर पालिका कार्यालय महज दो सौ मीटर की दूरी पर है, लेकिन रेलवे लाइन के उस पार बसे सकरौरा ग्रामीण और करनैलगंज ग्रामीण इलाकों की सूरत देखकर लगता है मानो आप किसी पिछड़े युग में आ गए हों। यहां विकास की किरणें रेलवे लाइन की पटरी पार नहीं कर पातीं हैं । नगर से सटे होने के बावजूद इन इलाकों को ''शहरी'' सुविधाओं से जानबूझकर दूर रखने का जो खेल परिसीमन में हुआ, उसका दर्द अब यहां की जनता की आंखों में साफ झलकता है। विकास के दावों की पोल खोलती सबसे भयावह तस्वीर हटही मार्ग स्थित रिसाला नई बस्ती में दिखती है। यहां बिजली विभाग के खंभे नहीं, बल्कि टेढ़े-मेढ़े बांस और बल्लियां बिजली के हाई-वोल्टेज तारों का बोझ ढो रही हैं। बरसात के दिनों में जब ये लकड़ियां गीली होती हैं, तो ...